जिसे भी देखिये वो अपने आप में गुम है !

जिसे भी देखिये वो अपने आप में गुम है !

कभी किसी को मुकम्मिल जहां नहीं मिलता !
कही ज़मीन तो कही आसमां नहीं मिलता !!

जिसे भी देखिये वो अपने आप में गुम है !
जुबा मिली है मगर हम जुबा नहीं मिलता !!
बुझा सका है यहाँ कौन वक़्त के शोले !
ये ऐसी आग है जिसमे धुँआ नहीं मिलता !!
ऐसा नहीं कि तेरे जहां में प्यार न हो ! लेकिन !
जहां उम्मीद हो लेकिन वहां नहीं मिलता !!

जिसे भी देखिये वो अपने आप में गुम है !
जिसे भी देखिये वो अपने आप में गुम है !

kabhee kisee ko mukammil jahaan nahin milata !

kahee zameen to kahee aasamaan nahin milata !!

jise bhee dekhiye vo apane aap mein gum hai !

juba milee hai magar ham juba nahin milata !!

bujha saka hai yahaan kaun vaqt ke shole !

ye aisee aag hai jisame dhuna nahin milata !!

aisa nahin ki tere jahaan mein pyaar na ho ! lekin !

jahaan ummeed ho lekin vahaan nahin milata !!

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