लोग जमीन से फलक तक पहुंचते हैं !

लोग जमीन से फलक तक पहुंचते हैं !

लोग जमीन से फलक तक पहुंचते हैं !

हम दौलत वालों के गुलाम रह गए !!
हम गरीब की औकात नहीं इससे बढ़कर !
सर को सजदा और हाथों को सलाम रह गए !!
चौधरी के बेटे चाहे कुछ भी कर ले  !
हम गरीबों के बेटे बदनाम रह गए  !!
अमीरों की शामे  सजती है मय से  !
हम गरीबों के अश्को के जाम रह गए !!
दस पढ़ के सूबेदार का बेटा हुआ फौजी  !
हम गरीबों के बीए भी नाकाम रह गए !!
साहूकार की दो छोरियां हैं हाथ भर की लेकिन !
हमारी जुवा को मेम साहब नाम रह गए !!
 अब चुप रहु तो कैसे तुम ही कहो यारो !
क्या अमिरो के घर जाकर राम रह गए !!

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