कई गम मिले हैं जिन्हें जुवा नहीं मिली !

कई गम मिले हैं जिन्हें जुवा नहीं मिली ! भटकता रहा हूं अंधेरों में समा नहीं मिली !! अपने अकेलेपन की कशिश बस इतनी सी है!  कि जिंदगी में हमें किसी से वफा नहीं मिली !!
कई गम मिले हैं जिन्हें जुवा नहीं मिली !भटकता रहा हूं अंधेरों में समा नहीं मिली !!अपने अकेलेपन की कशिश बस इतनी सी है! कि जिंदगी में हमें किसी से वफा नहीं मिली !!

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