रास्ते खुद ही अपनी तबाही के निकाले हमने !

रास्ते खुद ही अपनी तबाही के निकाले हमने ! कर दिया दिल किसी पत्थर के हवाले हमने !! अरे, हमको मालूम है कि क्या शै है यह मोहब्बत लोगों ! अपना घर फूंक के देखे हैं उजाले हमने!!  रास्ता कांटे के हर बार गुजर जाता है ! जैसे प्रदेश में त्यौहार गुजर जाता है !! जिंदगी इश्क में तो गुजरी है अपनी ऐसे ! जैसे बाजार से नदार गुजर जाता है!!

रास्ते खुद ही अपनी तबाही के निकाले हमने !


कर दिया दिल किसी पत्थर के हवाले हमने !!
अरे, हमको मालूम है कि क्या शै है यह मोहब्बत लोगों !
अपना घर फूंक के देखे हैं उजाले हमने!!
रास्ता कांटे के हर बार गुजर जाता है !
जैसे प्रदेश में त्यौहार गुजर जाता है !!
जिंदगी इश्क में तो गुजरी है अपनी ऐसे !
जैसे बाजार से नदार गुजर जाता है!!


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