कभी कहा नहीं तेरे से तेरे फसाने को!



कभी कहा नहीं तेरे से तेरे फसाने को!



जाने कैसे खबर लग गई इस जमाने को !!


दुआ बहार की मांगी तो इतने फूल मिले !


कहीं जगह नहीं मिली तेरे आशियाने को!!
कोई गम नहीं एक तेरी जुदाई के सिवा !


मेरे हिस्से में क्या आया तन्हाई के सिवा !!


मिलन की रात यूं तो मिली बेसुमार !


प्यार में सब कुछ मिला शहनाई के सिवा !!


कभी देख कर मुस्कुराया तो होता !


कभी हां में सर को हिलाया तो होता !!


बेवफाई का दर्द रोज देती हो हमें !


कभी अपने दरवाजे पर बुलाया तो होता!!
उड़ गया आज पंक्षी ही डाल से !


दिल बहलाते रहे है हम तेरे ख्याल से !!


अच्छा हुआ जो तुमने दामन छुरा लिया !


हम भी बच गये आने वाले भूचाल से!!



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