रंग तेरी जवानी दिखा गई क्या क्या !



आपके दिल में क्या है बता दीजिए ! यू ना खामोश रहकर सजा दीजिए !! या तो वादा वफा का पूरा करें ! या उम्मीदों की समा बुझा दीजिए !! आपको चाहकर कुछ ना चाहा कभी ! मेरी चाहत का कुछ तो सिला दीजिए !! फूल मुरझा गए आप की चाह में ! मुस्कुरा कर उन्हें फिर खिला दीजिए !! सफर में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो ! सभी हैं भीड़ में तुम भी निकल सको तो चलो !! किसी की वास्ते राय कहां बदलती है ! तुम अपने आपको खुद ही बदल सको तो चलो !! यहां किसी को कोई रास्ता नहीं मिलता ! मुझे गिरा के अगर तुम संभल सको तो चलो !! यही है जिंदगी कुछ खाक चाँद उम्मीदें ! इन्हीं खिलौनों से तुम भी बदल सको तो चलो !! लोग जमीन से फलक तक पहुंचते हैं ! हम दौलत वालों के गुलाम रह गए !! हम गरीब की औकात नहीं इससे बढ़कर ! सर को सजदा और हाथों को सलाम रह गए !! चौधरी के बेटे चाहे कुछ भी कर ले ! हम गरीबों के बेटे बदनाम रह गए !! अमीरों की शामे सजती है मय से ! हम गरीबों के अश्को के जाम रह गए !! दस पढ़ के सूबेदार का बेटा हुआ फौजी ! हम गरीबों के बीए भी नाकाम रह गए !! साहूकार की दो छोरियां हैं हाथ भर की लेकिन ! हमारी जुवा को मेम साहब नाम रह गए !! अब चुप रहु तो कैसे तुम ही कहो यारो ! क्या अमिरो के घर जाकर राम रह गए !!

 



रंग तेरी जवानी दिखा गई क्या क्या !


दीवाना ही नहीं जाने बना गई क्या -क्या !!

मैं तेरे शहर से परहेज करता हूं इसलिए  !

तेरी एक सखी मुझे बता गई क्या -क्या  !!

मैंने तो घूंघट ही उठाया था तेरे चेहरे से  !

जवानी तेरे ही परदे उठा गई क्या -क्या !!

मुझको तो बस दीदार की ही अश्क थी  !

मगर तेरी अदा ही जलवे दिखा गई क्या क्या !!

 

आपके दिल में क्या है बता दीजिए ! यू ना खामोश रहकर सजा दीजिए !! या तो वादा वफा का पूरा करें ! या उम्मीदों की समा बुझा दीजिए !! आपको चाहकर कुछ ना चाहा कभी ! मेरी चाहत का कुछ तो सिला दीजिए !! फूल मुरझा गए आप की चाह में ! मुस्कुरा कर उन्हें फिर खिला दीजिए !! सफर में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो ! सभी हैं भीड़ में तुम भी निकल सको तो चलो !! किसी की वास्ते राय कहां बदलती है ! तुम अपने आपको खुद ही बदल सको तो चलो !! यहां किसी को कोई रास्ता नहीं मिलता ! मुझे गिरा के अगर तुम संभल सको तो चलो !! यही है जिंदगी कुछ खाक चाँद उम्मीदें ! इन्हीं खिलौनों से तुम भी बदल सको तो चलो !! लोग जमीन से फलक तक पहुंचते हैं ! हम दौलत वालों के गुलाम रह गए !! हम गरीब की औकात नहीं इससे बढ़कर ! सर को सजदा और हाथों को सलाम रह गए !! चौधरी के बेटे चाहे कुछ भी कर ले ! हम गरीबों के बेटे बदनाम रह गए !! अमीरों की शामे सजती है मय से ! हम गरीबों के अश्को के जाम रह गए !! दस पढ़ के सूबेदार का बेटा हुआ फौजी ! हम गरीबों के बीए भी नाकाम रह गए !! साहूकार की दो छोरियां हैं हाथ भर की लेकिन ! हमारी जुवा को मेम साहब नाम रह गए !! अब चुप रहु तो कैसे तुम ही कहो यारो ! क्या अमिरो के घर जाकर राम रह गए !!

 

हम अपने रंगो गम बयां नहीं करते  !


अश्को से हाले दिल आया नहीं करते !!

बस एक ही वसूल है गरूर मत करो  !

हम गरीबों से सलाम दुआ नहीं करते  !!

कि जिसने भर दिए मेरी आंखों में आंसू  !

हम उस सितमगर से भी गिला नहीं करते  !!

यही है चलन  हमारा यही है जीने की अदा ! 

बिछड़ जाए तो दोबारा उससे मिला नहीं करते !!

जित लेते हैं इंसानों को प्यार मोहब्बत से  !

हां मगर जमीर से अपने गिरा नहीं करते  !!

हम फूल तो है  मगर नर्गिस के यारो !

यु हर एक आंगन में खिला नहीं करते  !!

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