जिंदगी से बड़ी सजा ही नहीं !

पत्थर में इंतजार भी मजा देता है लेकिन ज्यादा हो तो फिर सजा देता है वह आ जाते हैं तो मिल जाती हैं खुशी अगर वह ना आए तो गम बढ़ा देता है चांदनी सिमट जाती है मेरे पहलू में मेरी बाहों में जब वह खुद को गिरा देता है उनका प्यार मेरे यारों खजाना है मेरा जब भी मिलता है तो दोनों हाथों से लूटा देते हैं उसकी आंखों में समाया है पूरा मैं खाना अक्सर तन्हाइयों में वह फोटो से पिला देते हैं मत पूछो कितनी खुश ी देती है आधा वह देखकर मुझे हुआ जब पलके झुका देता है मेरे महबूब में क्या नहीं है मेरे थाने खुदा सबको कहां ऐसी हुस्नो अदा देता है राजीव दिल हमको बताया तो होता अपना दर्द हमको सुनाया तो होता मैं पी जाता तुम्हारा हर एक आंसू तुमने अपना सिर मेरे कंधे पर झुकाया तो होता तुम्हारे नाम पर लुटा देता खुशियां सभी काश तुमने मुझे अपना बनाया तो होता तुम्हारे जख्मों पर रख देता अपने होठों को हर जाहर पीर लेता जो तूने पिलाया तो होता गम से दूर बिठाया फूलों पर तुझे तुमने अगर मुझे दिल में बसाया तो होता
 

जिंदगी से बड़ी सजा ही नहीं !

और क्या जुल्म है पता ही नहीं !!

इतने हिस्सों में मैं बट गया हूं !

मेरे हिस्सों में कुछ भी बचा ही नहीं !!

सच घटे या बड़े सच तो सच ही रहे ! 

झूठ की तो कोई इंतहा ही नहीं !! 

जर दो चांदी में या सोने में इसे !! 

ऐसा कभी झूठ बोलता ही नहीं !!


फरेब था या हंसी मैं आशिकी समझ बैठा  !

मौत को ही मैं अपनी जिंदगी समझ बैठा !!

 वक़्त की गर्दिश थी या बदनसीबी मेरी  !

अपने साए को ही मैं अपनी चांदनी समझ बैठा  !!

वह कदम कदम पर गम देते गए मुझे  !

dil-e-nadaan इसे दिल्लगी समझ बैठे !!

 जिसकी पूजा में जीवन गुजार दिया मैंने !

 पत्थर की बूत थी मैं उसे देवी समझ बैठा !!

 

प्यार में इंतजार भी मजा देता है !

 लेकिन ज्यादा हो तो फिर सजा देता है !! 

वह आ जाते हैं तो मिल जाती हैं खुशी !

अगर वह ना आए तो गम बढ़ा देता है !!

चांदनी सिमट जाती है मेरे पहलू में !

मेरी बाहों में जब वह खुद को गिरा देता है !!

उनका प्यार मेरे यारों खजाना है मेरा !

जब भी मिलता है तो दोनों हाथों से लूटा देते हैं !!

उसकी आंखों में समाया है पूरा मैंखाना !

अक्सर तन्हाइयों में वह होंठो से पिला देते हैं !!

मत पूछो कितनी खुशी देती है अदा वो !

देखकर मुझे वो जब पलके झुका देता है !!

मेरे महबूब में क्या नहीं है मेरे यारो !

खुदा सबको कहां ऐसी हुस्नो अदा देता है !!

राजे दिल हमको बताया तो होता  !

अपना दर्द हमको सुनाया तो होता !!

मैं पी जाता तुम्हारा हर एक आंशु  !

तुमने अपना सिर मेरे कंधे पर झुकाया तो होता  !!

तुम्हारे नाम पर लुटा देता खुशियां सभी  !

काश तुमने मुझे अपना बनाया तो होता !!

तुम्हारे जख्मों पर रख देता अपने होठों को !

हर जहर पी लेता जो तूने पिलाया तो होता !!

गम से दूर बिठाता फूलों पर तुझे !

तुमने अगर मुझे दिल में बसाया तो होता!!

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वक्त के साथ-साथ हालात बदल जाते हैं !

वक्त के साथ-साथ हालात बदल जाते हैं ! अपनो तक के ख्यालात बदल जाते हैं !! जब बुरा वक्त आता है मेरे दोस्तों ! खुद अपने ही जज्बात बदल जाते हैं!! लोग देते हैं विश्वास फिर तोड़ देते हैं ! कुछ देर साथ देते हैं फिर छोड़ देते हैं !! इस जहां में क्या नहीं देखा हमने यारो! यहां लोग रोशनी दिखाकर आंखें फोड़ देते हैं!! लिखी कभी तकदीर की मरते दम तक न निकली ! इतनी बुरी हालात थी कि कफन में भी कमी निकली!! उठा जब मेरा जनाजा तो पारी भी धुन्नी निकली ! मेरी जब कब्र खोदी गई तो जमी भी पत्थर की निकली!! लोग आ गए आखरी रहनुमा की चालों में ! खौफ था अंधेरों का हम लुट गया उजालों में!! आप कुछ भी कहें लेकिन यह हमारा दावा है! कि, हम ही आके रहते हैं आपके ख्यालों में!! लम्हे मंजर व मंजर बिखरने लगे ! सारे दीवारो दर से उतरने लगे !! वक्त धूप दोनों पर एक सी पड़ी ! कि आप साँवला गए और हम निखरने लगे!! रस्ते दिखा दिए तमन्नाओं के शमशानों के! सीना चीर कर रख दिए रकीबों ने अरमानों के!! मोहब्बत का दुश्मन सदियों से रहा है जमाना ! कहां होते हैं पूरे दोस्तों ख्वाब हम दीवानों के!!
 

वक्त के साथ-साथ हालात बदल जाते हैं !

अपनो तक के ख्यालात बदल जाते हैं !!

जब बुरा वक्त आता है मेरे दोस्तों !

खुद अपने ही जज्बात बदल जाते हैं!!


लोग देते हैं विश्वास फिर तोड़ देते हैं !

कुछ देर साथ देते हैं फिर छोड़ देते हैं !!

इस जहां में क्या नहीं देखा हमने यारो! 

यहां लोग रोशनी दिखाकर आंखें फोड़ देते हैं!!

लिखी कभी तकदीर की मरते दम तक न निकली !

इतनी बुरी हालात थी कि कफन में भी कमी निकली!! 

उठा जब मेरा जनाजा तो पारी भी धुन्नी निकली !

मेरी जब कब्र खोदी गई तो जमी भी पत्थर की निकली!!


लोग आ गए आखरी रहनुमा की चालों में !

खौफ था अंधेरों का हम लुट गया उजालों में!! 

आप कुछ भी कहें लेकिन यह हमारा दावा है! 

कि, हम ही आके रहते हैं आपके ख्यालों में!!


लम्हे मंजर व मंजर बिखरने लगे !

सारे दीवारो दर से उतरने लगे !!

वक्त धूप दोनों पर एक सी पड़ी !

कि आप साँवला गए और हम निखरने लगे!!


रस्ते दिखा दिए तमन्नाओं के शमशानों के! 

सीना चीर कर रख दिए रकीबों ने अरमानों के!! 

मोहब्बत का दुश्मन सदियों से रहा है जमाना !

कहां होते हैं पूरे दोस्तों ख्वाब हम दीवानों के!!

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आज हो गया हूं मैं तनहा मेरा कोई गमखार नहीं है!

आज हो गया हूं मैं तनहा मेरा कोई गमखार नहीं है! है मौत पर भरोसा मगर जिंदगी का इतवार नहीं है !! कभी साथ साथ जीने की कसम खाई थी यार ने ! आज उसके ही दिल में मेरे लिए प्यार नहीं है !!

आज हो गया हूं मैं तनहा मेरा कोई गमखार नहीं है!

 है मौत पर भरोसा मगर जिंदगी का इतवार नहीं है !!

कभी साथ साथ जीने की कसम खाई थी यार ने !
आज उसके ही दिल में मेरे लिए प्यार नहीं है !!

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फर्क होता है बहुत घर और मकान में!

फर्क होता है बहुत घर और मकान में! जितना कि होता है आदमी और इंसान में !! राम इस दौर में बनवास में ही रहते हैं जबकि! रावण भरे पड़े कदम कदम पर इस जहान में!!

फर्क होता है बहुत घर और मकान में!

 जितना कि होता है आदमी और इंसान में !!

राम इस दौर में बनवास में ही रहते हैं जबकि!

रावण भरे पड़े कदम कदम पर इस जहान में!!

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