मेरी अपनी हैं मंजिलें !

मेरी अपनी हैं मंजिलें !

ना किसी से ईर्ष्या ना किसी से कोई होड़ !!
मेरी अपनी हैं मंजिलें मेरी अपनी दौड़ !!

मेरी अपनी हैं मंजिलें !
मेरी अपनी हैं मंजिलें !

Neither jealous nor jealous of anyone !!
My own floors are my own race !!

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जिंदिगी भर  रुलाने  के लिये !

हजारों खुशिया कम है ! गम एक भुलाने के लिये !

हजारों  खुशिया कम है ! गम एक  भुलाने के लिये !

एक गम काफी है ! जिंदिगी भर  रुलाने  के लिये !!

हुशन  जवानी पर  एतबार  करने वाले अक्सर धोखा  खाते है !

बड़े  कातिल  है ये  नशीले  नयन  वाले मगर बेगुनाह नज़र आते  है !!

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फरियाद तेरी सुनके कहते है ये लोग !

फरियाद तेरी सुनके कहते है ये लोग !

फरियाद तेरी सुनके कहते है ये लोग !

अरे ! हालत की दीवार गिरा क्यों नहीं देते !!

कुछ और जालिमत है जो कहते है कि कासिद !

अरे ! दुश्मने जॉ है भुला क्यों नहीं देते !!

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सुना है चाहत में आँख जुबा होती है !

सुना है चाहत में आँख जुबा होती है !

सुना है चाहत में आँख जुबा होती है !

सच्ची चाहत तो मगर बेजुबा होती है !!

आप गम ही करते है तो बेशक करे !

गम सहने से तो  चाहत जुबा होती  है !!

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मुहबबत की राहो पे चलना संभल के !

मुहबबत की राहो पे चलना संभल के !

मुहबबत की राहो पे चलना संभल के !

यहाँ जो भी आया गया हाथ मलके !!

न पाया किसी ने  महोबत में मंजिल !

कदम डगमगाये ज़रा दूर चलके !!

हमें ढूढ़ती  है बहारों की दुनिया !

कहाँ आ गए हम चमन से निकलके !!

कही टूट न जाये ये हसरत भरा दिल !

न यू  तीर  भोके निशाना बदले !!

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कितनी उलझनों का शिकार है ज़िन्दगी !

कितनी उलझनों का शिकार है ज़िन्दगी !

कितनी उलझनों का शिकार है ज़िन्दगी !

एक मुदत से अपनी बेक़रार है ज़िन्दगी !!

हर सास बयाज की सूरत हो रहा है अदा !

किसी महाजन से लिया उधार है ज़िन्दगी !!

कोई जोश है न उमंग है  न ख्वाईस न आरज़ू !

जबसे बिछुड़े तुम तबसे  बेक़रार है जिंदिगी !!

चलो  कही और चले गम न हो जहां !

इस शहर में तो दर्द का  अम्बार है ज़िन्दगी !!

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